शिशु को नहलाते समय ध्‍यान रखें ये 2 बातें, नहीं पड़ेंगे बीमार

QUICK BITES

  • नहलाते समय ऐसा काम बिल्‍कुल भी नहीं करना है जिससे बच्‍चे को किसी प्रकार की समस्‍या न हो।
  • शिशु को उसकी नींद के समय के आसपास न नहलाएं, शिशु जब भूखा हो तब उसे न नहलाएं
  • नहलाते समय शिशु को ठंड न लगे ऐसी कुछ बातों का ध्‍यान रखना जरूरी है।
शिशु को नहलाते समय ध्‍यान रखें ये 2 बातें, नहीं पड़ेंगे बीमार
शिशु को नहलाते समय ध्‍यान रखें ये 2 बातें, नहीं पड़ेंगे बीमार

बच्चों को समय पर मालिश करना और उनको नहलाना बहुत जरूरी है। हालांकि बच्‍चों को कब और कैसे नहलाना है ये आप स्‍वयं तय कर सकती हैं। आपको नहलाते समय ऐसा काम बिल्‍कुल भी नहीं करना है जिससे बच्‍चे को किसी प्रकार की समस्‍या न हो। लेकिन कुछ बातों का ध्‍यान रखना जरूरी है। शिशु को उसकी नींद के समय के आसपास न नहलाएं, शिशु जब भूखा हो तब उसे न नहलाएं और नहलाते समय शिशु को ठंड न लगे ऐसी कुछ बातों का ध्‍यान रखना जरूरी है। 

कब नहलाएं?  

पारंपरिक तौर पर कहा जाए तो शिशु को सूर्योदय से पहले या फिर सुबह के समय नहलाना सबसे अच्छा माना जाता था। ऐसा शायद इसलिए था ताकि नहाने के बाद दिन चढ़ने पर गर्मी बढ़ने से शिशु को फिर से गर्माहट मिल सके।
इस पुरानी परंपरा के पीछे शायद कुछ तर्क जरुर है। नवजात शिशु अपने शरीर का तापमान सही से नियंत्रित नहीं कर पाते और उन्हें बहुत जल्दी ठंड लग सकती है। यदि शिशु को ठंड लगेगी, तो वह स्नान का आनंद नहीं ले सकेगा। इसलिए जब दिन चढ़ने लगे और गर्मी बढ़ती जाए, तब शिशु को आरामदायक तरीके से नहलाया जा सकता है।
इस तरह नहाने के बाद भी शिशु को गर्माहट मिलती रहेगी। यदि आपकी दिनचर्या में ऐसा कर पाना आसान हो, तो अच्छा है। मगर, शिशु को शाम के समय नहलाना भी उतना ही सही है और इससे शिशु को सर्दी-जुकाम लगने का खतरा नहीं बढ़ता, जैसा कि अक्सर माना जाता है। 

कैसा हो पानी तापमान  

नहलाने के लिए हल्का गर्म पानी इस्तेमाल करें। शिशु को नहलाने के लिए पानी का आदर्श तापमान 38 डिग्री सेल्सियस या 100.4 डिग्री फेहरनहाइट माना जाता है। यदि आपके पास बाथ थर्मोमीटर नहीं है, तो आप अपनी कोहनी से पानी का तापमान जांच सकती हैं। यह आपको हल्का गर्म महसूस होना चाहिए, तेज गर्म नहीं।

बच्‍चों को नहलाने से पहले क्‍या करें 

  • बच्चे को नहलाने से पहले ही सारी तैयारी कर लें और पानी हल्का गुनगुना रखें ताकि उसे सर्दी न लग जाये।
  • सप्ताह में हर दिन साबुन और शैम्पू लगाने की जरूरत नहीं है, दो से तीन बार ही इसका प्रयोग करें।
  • जो उतपाद आप प्रयोग कर रही हैं उसकी मैनुफैक्चरिंग डेट आदि अच्छे से देख लें और उसमें पड़े तत्व भी देख लें। सभी निर्देशों को अच्छी तरह पढ़ने के बाद ही इस्तेमाल करें।
  • नहाने से पहले बच्चे की मालिश करें और नहाने के बाद उसकी त्वचा पर मॉइश्चेराइजर लगाना न भूलें। इससे उसे खुजली और जलन नहीं होगी।
  • साबुन के प्रयोग से पहले
  • पहली बार बच्चे को शैम्पू या साबुन से नहलाने वाली हैं और तो इस्ते माल से पहले उसकी त्वचा पर साबुन लगाकर देख लें कि कहीं उसे इससे नुकसान तो नहीं होगा। त्वचा के लाल पड़ने पर या खुजली होने पर उस उत्‍पाद का प्रयोग न करें।
  • छ: महीने से छोटे बच्चे को साबुन की बट्टी से रगड़कर कभी न नहलायें। साबुन को हाथ में लगाकर तब बच्चे के शरीर पर लगायें। इससे उसकी त्वचा पर रगड़ नहीं होगी।
  • सुगंध मुक्त साबुन का प्रयोग करें, जिन साबुनों में महक आती है उनमें केमिकल अधिक होते हैं, उनका प्रयोग करने से बचें।
  • बच्चे की त्वचा को बहुत ज्यादा रगड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती है क्योंकि उनकी त्वचा पर धूल जमा नहीं होती है। आप सिर्फ मालिश करें और नहला दें।
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