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13 Mar 2019

बिना ऑपरेशन के भी हो सकता है किडनी स्‍टोन का सफाया, ये हैं 4 आयुर्वेदिक तरीके

किडनी मानव शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। ये पेट की गुहा के पीछे स्थित होते हैं। किडनी के दो मुख्‍य कार्य हैं: पहला, मानव शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना और दूसरा, शरीर में पानी, रासायनिक और खनिज स्तरों को बनाए रखना। इनका अंतिम उत्पाद मूत्र रूप में होता है। स्वस्थ जीवन के लिए, व्यक्ति के गुर्दे का स्‍वस्‍थ होना बहुत जरूरी है। मनुष्य प्रतिदिन विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का उपभोग करता है जो बाद में ऊर्जा में परिवर्तित हो जाते हैं, यह प्रक्रिया विषाक्त पदार्थों के रूप में सह-उत्‍पादों का निर्माण करती है जो शरीर के लिए खतरनाक हो सकते हैं। ऐसे जहरीले पदार्थों का संचय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। 




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क्‍यों बनती है किडनी में पथरी 

आमतौर पर शरीर में पानी की कमी से गुर्दे की पथरी बन सकती है। ये पत्थर या तो मटर के आकार के हो सकते हैं या गोल्फ की गेंद जैसे विशाल भी हो सकते हैं। वे आमतौर पर कुछ अन्य यौगिकों के साथ कैल्शियम ऑक्सालेट से बने होते हैं और संरचना में क्रिस्टलीय होते हैं। गुर्दे की पथरी का निर्माण आपको शरीर के निचले पेट क्षेत्र में पेशाब करने के दौरान दर्द दे सकता है। इसकी वजह से वजन कम होने, बुखार, मतली, हेमट्यूरिया आदि की समस्‍या हो सकती है। गुर्दे की पथरी ज्यादातर सर्जरी द्वारा हटा दी जाती है; हालाँकि कुछ लोग आयुर्वेदिक उपचार की मदद से इन पत्थरों से छुटकारा पा सकते हैं। 




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क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट 

कैलाश नेचुरोपैथी हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के चिकित्‍सा प्रभारी, डॉक्‍टर उमाशंकर शर्मा कहते हैं कि, डाई यूरिटिक्‍स (मूत्रवर्धक) चीजों के सेवन से 9 से 10 एमएम के किडनी स्‍टोन को मूत्र के रास्‍ते बाहर निकाला जा सकता है, इसके साथ-साथ हमें अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाने की जरूरत है। स्‍वस्‍थ खानपान के साथ पानी भी भरपूर मात्रा में पीना चाहिए। इससे किडनी की सफाई होती रहती है। रोजाना एक्‍सरसाइज भी जरूर करनी चाहिए। कुछ मूत्रवर्धक खाद्य पदार्थ हैं जिनके माध्‍यम से किडनी स्‍टोन को बिना ऑपरेशन के भी निकाला जा सकता है।   

लेमन जूस के साथ ऑलिव ऑयल

नींबू का रस और खाद्य तेल का संयोजन थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन यह एक बहुत प्रभावी किडनी स्टोन का आयुर्वेदिक उपचार है। जो लोग अपने गुर्दे से पत्थरों को हटाने की इच्छा रखते हैं, उन्हें प्राकृतिक रूप से इस तरल को रोजाना पीना चाहिए जब तक कि पथरी निकल न जाए। नींबू का रस पत्थरों को तोड़ने में मदद करता है जबकि जैतून का तेल उनके लिए स्नेहक के रूप में कार्य करता है ताकि बिना किसी परेशानी से स्‍टोन बाहर निकल सके। गुनगुने पानी में आधा नीबू का रस डालकर रोजाना पी सकते हैं। 
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तुलसी के रस के साथ पानी पीना





यह हमें हाइड्रेटेड रहने में मदद करता है और यह रोगमुक्त जीवन के लिए शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखता है। यह पाचन और अवशोषण की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। आमतौर पर, एक स्वस्थ इंसान को दिन में 7-8 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है। पानी विषहरण के लिए सबसे अच्छा है और हमारे शरीर से अनावश्यक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है जो कि गुर्दे के साथ-साथ अन्य अंगों को और नुकसान पहुंचा सकता है।
गुर्दे की पथरी से पीड़ित लोगों को मूत्र के माध्यम से इन पत्थरों को बाहर निकालने के लिए बहुत सारा पानी पीना चाहिए। सर्वोत्तम प्रभावों के लिए, तुलसी के रस के साथ पानी पीता चाहिए, क्योंकि तुलसी को शरीर में तरल पदार्थ, खनिज और यूरिक एसिड संतुलन बनाए रखने के लिए बेहतर माना जाता है। 




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नारियल पानी

नारियल पोषक तत्वों से भरा है और स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है। नारियल पानी जो एक कच्चे हरे नारियल के अंदर मौजूद होता है, स्वास्थ्य के लिए बेहद अच्छा होता है और अगर किसी को किडनी में पथरी है तो इसका सेवन करना चाहिए। यह गुर्दे की पथरी के आयुर्वेदिक उपचार का एक अच्छा रूप है और पथरी को गलाने में मदद करता है और अंत में मूत्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है।

जौ का पानी 

किडनी की पथरी के लिए भी यह अचूक औषधि है। एक गिलास जौ के पानी का रोजाना सेवन करने से किडनी की पथरी शरीर से बाहर निकल जाती है और आपकी किडनी स्वस्थ रहती है।




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